एस टी जी सी और एल टी सी जी पर देर आई दुरुस्त आई वित्त मंत्री निर्मला सीता रमन

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वित्त मंत्री निर्मला सीता रमन ने सोमवार को कहा कि वह शेयरों की बिक्री से होने वाले लाभ पर लगने वाले शार्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स ( एस टी जी सी ) और लांग टर्म कैपिटल गेन टैक्स ( एल टी सी जी ) को लेकर निवेशकों की चिंताओं को सुनने के लिए तैयार हैं। दर असल 2024 में एस टी जी सी,एल टी सी जी और एस टी टी की दरों में की गई भारी वृद्धि के बाद अब देश में निवेशक शार्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स के रूप में 20 प्रतिशत और लांग टर्म कैपिटल गेन टैक्स के रूप में 12.5 प्रतिशत टैक्स के साथ साथ स्क्योरिटी ट्रांजेक्शन टैक्स के रूप में 0.1 प्रतिशत टैक्स देते हैं। 2024 के चुनाव से पहले मुंबई में निवेशकों के साथ हुई एक बैठक में विभिन्न निवेशकों ने वित्त मंत्री को एस टी जी सी,एल टी सी जी और एस टी टी को लेकर अपनी चिंताओं के बारे में बताया गया था लेकिन 2024 में सरकार बनने के बाद टैक्स की दरों में ज्यादा वृद्धि कर दी गई।

वित्त मंत्री ने संसद में खड़े हो कर उस समय कहा कि देश के निवेशक अब भारतीय बाजार को संभालने में सक्षम हैं और भारतीय बाजार अब विदेशी निवेशकों पर ज्यादा निर्भर नहीं है। इस से विदेशी निवेशकों में गलत सन्देश गया और 2024 में विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार में 3 लाख 2 हजार 434 करोड़ रूपए की बिकवाई की जबकि 2025 में यह बिकवाली बढ़ कर 3 लाख 6 हजार 419 करोड़ रूपए हो गई। 2026 में अब तक विदेशी निवेशक भारतीय बाजार में 2 लाख 72 हजार 158 करोड़ रूपए की बिकवाली कर चुके हैं। वैसे तो विदेशी निवेशक 2020 में आखिरी बार भारतीय बाजार के कैश सेगमेंट में नेट बायर थे और इस वर्ष में विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाज़ारों में 64,379 करोड़

रूपए की खरीद की थी। इसके बाद 2021 में विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार में 92,279 करोड़ रूपए की बिकवाली की जबकि 2022 में 2,78,429 करोड़ रूपए, 2023 में 16510 करोड़ रूपए की बिकवाली की लेकिन बिकवाली ने ज्यादा जोर 2024 में टैक्स की दरों के बढ़ने के बाद पकड़ा।

2004 से पहले देश में स्क्योरिटी ट्रांजेक्शन टैक्स नहीं लगता था और देश में शेयरों की खरीद बिक्री पर होने वाले लाभ पर कैपिटल गेन टैक्स देना पड़ता था। तत्कालीन वित्त मंत्री पी चिदंबरम में अक्तूबर 2004 में स्क्योरिटी ट्रांसजेक्शन टैक्स ( एस टी टी ) लांच किया था इसका मकसद टैक्स में पारदर्शिता लाना था और 2018 तक यही व्यवस्था चली और शेयरों की खरीद बिक्री पर सिर्फ एस टी टी ही लागू था और कैपिटल गेन टैक्स समाप्त कर दिया गया। इसी बीच देश के शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों ने काफी पैसे भी लगाए लेकिन 2018 में तत्कालीन वित्त्त मंत्री स्वर्गीय अरुण जेटली ने एक बार फिर कैपिटल गेन टैक्स लागू कर दिया लेकिन 2004 में इस टैक्स की जगह पर लागू किए गए एस टी टी को हटाया नहीं गया और अब शेयरों की खरीद और बिक्री पर निवेशकों को एस टी टी भी देना पड़ता है और शेयरों से होने वाले लाभ पर कैपिटल गेन टैक्स भी देना पड़ता है।विदेशी निवेशक जब भारत में पैसा लगाते हैं तो उनके सामने इस प्रकार के टैक्स के अलावा करंसी में आने वाली गिरावट से होने वाले नुक्सान का भी खतरा रहता है लिहाजा भारतीय बाजार विदेशी निवेशकों के लिए आकर्षक नहीं रह जाता ।

खैर अब वैश्विक हालत बदलने के साथ कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी के कारण भारतीय मुद्रा पर दबाव बढ़ा है और हमने डालर के मुकाबले रूपए को 97 रूपए तक के स्तर पर गिरते देखा है लिहाजा ऐसे में अब वित्त मंत्री निर्मला सीता रमन को निवेशकों की चिंताओं ख़ास तौर पर विदेशी निवेशकों की चिंताओं का एहसास हुआ है ,चलो खैर देर से ही सही लेकिन वित्त मंत्री दुरुस्त आ रही है क्योंकि देश के विकास

और रोजगार के सृजन के लिए ऍफ़ डी आई ( फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट ) के अलावा एफ आई आई की भी जरूरत है। यदि अमरीका जैसे आर्थिक रूप से संम्पन और इतनी बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देश का राष्ट्रपति दुनिया के हर देश में जा कर साम दाम दंड भेद की रणनीति पर चलते हुए अन्य देशों को अपने देश में 5.77 ट्रिलियन डालर लगाने के लिए मजबूर कर सकता है तो हम अपनी नीतियों में थोड़ा बदलाव कर के विदेशी निवेशकों को आकर्षित क्यों नहीं कर सकते। आखिर हमारे धर्म ग्रंथ तो आती हुई लक्ष्मी का स्वागत करने की शिक्षा देते हैं और दीपवाली के दिन हम माँ लक्ष्मी जी के आगमन के लिए पूजन करते हैं और उनके स्वागत के लिए घर को पूरी तरह से सजा दिया जाता है तो विदेशी निवेशकों के जरिए आने वाली लक्ष्मी के स्वागत के लिए भी हमें उसी भावना के साथ काम करना चाहिए ।

इसी बहाने देश म्यूचल फंड में निवेश करने वाले उस छोटे निवेशक का भी भला हो जाएगा क्योंकि छोटे निवेशक को बाजार की समझ नहीं है और वह अपनी रिटायरमेंट,बच्चों की शादी और पढ़ाई के लिए म्यूचल फंड में पैसे लगाता है और पूरी उम्र अपनी छोटी मोती जरूरतों से समझौता कर के बचत को सहेज कर रखता है लेकिन उसे अंत में इस बचत पर भी भारी टैक्स देना पड़ता है। यदि कैपिटल गेन टैक्स से राहत मिलती है तो देश के शेयर बाजार के निवेशकों के साथ साथ इस छोटे म्यूचल फंड निवेशक को भी भारी राहत ।

Writer & Journalist

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